कोरोना वायरस
क्या होती है PANDEMIC यानी विश्व महामारी?
कोरोनावायरस से फैलने वाली बीमारी COVID-19 अब महामारी बन चुकी है. The US Centres for Disease control and Prevention के मुताबिक कई देशों में फैल चुकी बीमारी को महामारी कहा जाता है. इससे बड़ी तादाद में लोग प्रभावित होते हैं. इसकी परिभाषा के मुताबिक अचानक किसी जगह बीमारी के सामान्य से अधिक केस सामने आने को महामारी कहते हैं. यानी महामारी का संबंध किसी बीमारी के भीषण रूप लेने से ज्यादा अधिक से अधिक जगहों पर फैलने से जुड़ा है. दुनिया के दो क्षेत्रों में फैल जाए तो आम तौर पर WHO इसे महामारी घोषित कर देता है. जबकि COVID-19 चार महादेशों में फैल चुकी है.
कोरोनावायरस के PANDEMIC घोषित होने का क्या मतलब है?
महामारी घोषित से कोरोनावायरस को रोकने के तरीकों पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा. इसका मतलब यह नहीं है कि महामारी घोषित होने के बाद WHO को लड़ने के लिए ज्यादा फंड मिल जाएगा या इसे ज्यादा अधिकार मिल जाएगा. लेकिन महामारी के औपचारिक ऐलान से यह साफ हो गया है कि COVID-19 को लेकर WHO का आकलन एक नये लेवल पर पहुंच गया है.
क्या PANDEMIC कहने से बीमारी की भयावहता बढ़ जाती है?
PANDEMIC का बीमारी की गंभीरता से कोई मतलब नहीं है. इसका मतलब यह है कि यह बीमारी ज्यादा से ज्यादा इलाकों में फैल रही है. कोई कम भीषण बीमारी भी महामारी हो सकती है. जैसे 2009 में फैली H1N1 फ्लू थी. रेगुलर सीजन के फ्लू में मरने की दर 0.1 फीसदी होती है. जबकि COVID-19 SARS और MERS से अधिक जानलेवा है. भले ही ये इनसे तेजी से फैल रही है.
कैसे मिलेगा कोरोना से छुटकारा आइये जानते है
किसी भी लाइलाज बीमारी का इलाज असंभव नहीं है बशर्ते डॉक्टर अपने काम का माहिर होना चाहिए। इसी प्रकार कोरोना वायरस तथा किसी भी अन्य बीमारी से निजात एक डॉक्टर अर्थात पूर्ण तत्वदर्शी संत की शरण में जाने से मिल सकती है। वर्तमान समय में वह संत कोई और नहीं बल्कि संत रामपाल जी महाराज हैं जो शास्त्र अनुकूल प्रमाणित साधना बताते हैं जिससे हर बीमारी से निजात पाई जा सकती है। अब तक कैंसर,एड्स, टीबी , कोढ़ और अन्य लाइलाज बीमारियों के असंख्य रोगी संत रामपाल जी की शरण में आकर अपना इलाज करवा चुके हैं। या यूं कहें कि परमात्मा स्वरूप संत रामपाल जी ने इन्हें मौत के मुंह से वापस निकाल कर नया जीवन सतभक्ति करने के लिए दिया है तो यह अतिश्योक्ति नहीं होगी।
सतगुरु शरण में आने से आई टले बला,जो मस्तक में सूली हो, वो कांटे में टलजा।।
एक सच्चे सतगुरु से नाम लेकर मर्यादा में रहकर भक्ति करने से कोई भी हानि नहीं हो सकती बल्कि कोई मुश्किल आनी भी हो तो वो भी छोटी होकर टल जाती है।
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