Posts

मानवता क्या है

Image
मानव का सबसे बड़ा गुण है सदचरित्र अर्थात सुंदर चरित्र, परंतु आज इंसान की हालत को देखकर लगता है कि जैसे उसका यह सर्वश्रेष्ठ गुण ही कही लुप्त हो गया है। ईश्वर का अंश होकर भी वह निर्मलता, पावनता आदि ईश्वरीय गुणों से विहीन हुआ दृष्टिगोचर हो रहा है।  आखिर इसका कारण क्या है। इसका कारण यही कि आज का मानव अपनी इच्छाओं और कामनाओं के वशीभूत हो गया है और ऐशो-आराम के साधन पाने की उसमें ऐसी ललक है जिसकी प्राप्ति के लिए वह कुछ भी कर गुजरने को तैयार है। उसकी इसी तृष्णा में बहुत बार उसका चरित्र तक स्वाह हो जाता है। बाद में इन धब्बों को छुपाने के लिए कई तरह के आवरण ओढ़ता है पर सब विफल प्रतीत होता है।  यदि मानव अपने जीवन को सदमार्ग की ओर अग्रसर बढ़ना चाहता है तो उसे आवश्यकता है एक पूर्ण सदगुरु के पावन सानिध्य को प्राप्त करने की, जो उसे जीवन के लक्ष्य के प्रति जागरूक कर मानव के घट भीतर ब्रह्मज्ञान का प्रकाश रूप को प्रकट कर दे और मानव की भटकी हुई दिशा को सही राह दिखाए। ईश्वर का संग प्राप्त कर ही मनुष्य में सदचरित्र के गुणों का आगमन हो सकता है। आज के आधुनिक समाज म...

कोरोना वायरस

Image
क्या होती है PANDEMIC यानी विश्व महामारी? कोरोनावायरस से फैलने वाली बीमारी COVID-19 अब महामारी बन चुकी है. The US Centres for Disease control and Prevention के मुताबिक कई देशों में फैल चुकी बीमारी को महामारी कहा जाता है. इससे बड़ी तादाद में लोग प्रभावित होते हैं. इसकी परिभाषा के मुताबिक अचानक किसी जगह बीमारी के सामान्य से अधिक केस सामने आने को महामारी कहते हैं. यानी महामारी का संबंध किसी बीमारी के भीषण रूप लेने से ज्यादा अधिक से अधिक जगहों पर फैलने से जुड़ा है. दुनिया के दो क्षेत्रों में फैल जाए तो आम तौर पर WHO इसे महामारी घोषित कर देता है. जबकि COVID-19 चार महादेशों में फैल चुकी है. कोरोनावायरस के PANDEMIC घोषित होने का क्या मतलब है? महामारी घोषित से कोरोनावायरस को रोकने के तरीकों पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा. इसका मतलब यह नहीं है कि महामारी घोषित होने के बाद WHO को लड़ने के लिए ज्यादा फंड मिल जाएगा या इसे ज्यादा अधिकार मिल जाएगा. लेकिन महामारी के औपचारिक ऐलान से यह साफ हो गया है कि COVID-19 को लेकर WHO का आकलन एक नये लेवल पर पहुंच गया है. क्या P...

पूर्ण संत की पहचान

Image
पवित्र सद्ग्रन्थों से पूर्ण संत की पहचान वेदों, गीता जी आदि पवित्र सद्ग्रंथों में प्रमाण मिलता है कि जब-जब धर्म की हानि होती है व अधर्म की वृद्धि होती है तथा वर्तमान के नकली संत, महंत व गुरुओं द्वारा भक्ति मार्ग के स्वरूप को बिगाड़ दिया गया होता है। फिर परमेश्वर स्वयं आकर या अपने परमज्ञानी संत को भेज कर सच्चे ज्ञान के द्वारा धर्म की पुनः स्थापना करता है। वह भक्ति मार्ग को शास्त्रों के अनुसार समझाता है। उसकी पहचान होती है कि वर्तमान के धर्म गुरु उसके विरोध में खड़े होकर राजा व प्रजा को गुमराह करके उसके ऊपर अत्याचार करवाते हैं। कबीर साहेब जी अपनी वाणी में कहते हैं कि- जो मम संत सत उपदेश दृढ़ावै (बतावै), वाके संग सभि राड़ बढ़ावै। या सब संत महंतन की करणी, धर्मदास मैं तो से वर्णी।। कबीर साहेब अपने प्रिय शिष्य धर्मदास को इस वाणी में ये समझा रहे हैं कि जो मेरा संत सत भक्ति मार्ग को बताएगा उसके साथ सभी संत व महंत झगड़ा करेंगे। ये उसकी पहचान होगी। दूसरी पहचान वह संत सभी धर्म ग्रंथों का पूर्ण जानकार होता है। प्रमाण सतगुरु गरीबदास जी की ...

नशा करता है नाश

Image
 नशा सर्वप्रथम तो इंसान को शैतान बनाता है फिर शरीर का नाश हृदय है। शरीर के चार महत्वपूर्ण अंग हैं फेफड़े, लीवर, गुर्दे, हृदय। शराब सबसे प्रथम इन चारों अंगों को खराब करती है। शराब में ऐसा नशा है जो अनमोल मानव जीवन को बर्बाद कर देती है। सद्भगति में ऐसा नशा है जो मर्यादा में रहकर की जाए तो जीवन को आबाद कर देती है। फैसला आपको करना है। शराब व अन्य विकारों में मानव जीवन को उलझाकर मानव को सद्भगति से दूर रखना काल की सुनियोजित चाल है। भोली जनता काल कसाई की चाल में फंस रही है। शराबी व्यक्ति का शरीर रोगों की खान बन जाता है। जिस कारण उनके परिवार को उनके नशे और बीमारियों पर खर्च के कारण दोहरी मार पड़ती है। इन सब से निजात पाने के लिए रोज सुने संत रामपाल जी महाराज जी के सत्संग साधना टीवी पर रोजाना 7:30 pm से व ईश्वर टीवी पर रात 8:30 से