मानवता क्या है
मानव का सबसे बड़ा गुण है सदचरित्र अर्थात सुंदर चरित्र, परंतु आज इंसान की हालत को देखकर लगता है कि जैसे उसका यह सर्वश्रेष्ठ गुण ही कही लुप्त हो गया है। ईश्वर का अंश होकर भी वह निर्मलता, पावनता आदि ईश्वरीय गुणों से विहीन हुआ दृष्टिगोचर हो रहा है। आखिर इसका कारण क्या है। इसका कारण यही कि आज का मानव अपनी इच्छाओं और कामनाओं के वशीभूत हो गया है और ऐशो-आराम के साधन पाने की उसमें ऐसी ललक है जिसकी प्राप्ति के लिए वह कुछ भी कर गुजरने को तैयार है। उसकी इसी तृष्णा में बहुत बार उसका चरित्र तक स्वाह हो जाता है। बाद में इन धब्बों को छुपाने के लिए कई तरह के आवरण ओढ़ता है पर सब विफल प्रतीत होता है। यदि मानव अपने जीवन को सदमार्ग की ओर अग्रसर बढ़ना चाहता है तो उसे आवश्यकता है एक पूर्ण सदगुरु के पावन सानिध्य को प्राप्त करने की, जो उसे जीवन के लक्ष्य के प्रति जागरूक कर मानव के घट भीतर ब्रह्मज्ञान का प्रकाश रूप को प्रकट कर दे और मानव की भटकी हुई दिशा को सही राह दिखाए। ईश्वर का संग प्राप्त कर ही मनुष्य में सदचरित्र के गुणों का आगमन हो सकता है। आज के आधुनिक समाज म...