मानवता क्या है

मानव का सबसे बड़ा गुण है सदचरित्र अर्थात सुंदर चरित्र, परंतु आज इंसान की हालत को देखकर लगता है कि जैसे उसका यह सर्वश्रेष्ठ गुण ही कही लुप्त हो गया है। ईश्वर का अंश होकर भी वह निर्मलता, पावनता आदि ईश्वरीय गुणों से विहीन हुआ दृष्टिगोचर हो रहा है। 
आखिर इसका कारण क्या है। इसका कारण यही कि आज का मानव अपनी इच्छाओं और कामनाओं के वशीभूत हो गया है और ऐशो-आराम के साधन पाने की उसमें ऐसी ललक है जिसकी प्राप्ति के लिए वह कुछ भी कर गुजरने को तैयार है। उसकी इसी तृष्णा में बहुत बार उसका चरित्र तक स्वाह हो जाता है। बाद में इन धब्बों को छुपाने के लिए कई तरह के आवरण ओढ़ता है पर सब विफल प्रतीत होता है।

 यदि मानव अपने जीवन को सदमार्ग की ओर अग्रसर बढ़ना चाहता है तो उसे आवश्यकता है एक पूर्ण सदगुरु के पावन सानिध्य को प्राप्त करने की, जो उसे जीवन के लक्ष्य के प्रति जागरूक कर मानव के घट भीतर ब्रह्मज्ञान का प्रकाश रूप को प्रकट कर दे और मानव की भटकी हुई दिशा को सही राह दिखाए। ईश्वर का संग प्राप्त कर ही मनुष्य में सदचरित्र के गुणों का आगमन हो सकता है।
आज के आधुनिक समाज में बहुत सारी बुराइयां लोगों के जीवन में घर कर गई है। जैसे नशा दहेज प्रथा चोरी डकैती बुरा व्यवहार करना आदि आदि। कुछ ऐसे बुराइयां जो हम चाह कर भी छोड़ नहीं पाते हैं। कुछ ऐसी कुरीतियां जिन्हें परंपरा का नाम देकर हम करते चले आ रहे हैं। इन बुराइयों से बचना काफी मुश्किल है लेकिन संत रामपाल जी महाराज के ज्ञान के द्वारा एवं बुराइयों से छुटकारा पाना आसान हो गया है। उनके द्वारा बताए गए सद्भक्ति से लाखों लोगों द्वारा बुराइयों से छुटकारा पाया गया है ।

देशवासियो! संत रामपाल दास जी महाराज का उद्देश्य है कि अपने देश की जनता बुराइयों से बचे, शान्तिपूर्वक निर्मल जीवन जीए। परमेश्वर की भक्ति करे, अपने पूर्वजों की तरह बाँट कर खाए। दूसरे की माँ, बहन, बेटी अपनी ही माने। परमात्मा कहते हैं:- “पर नारी को देखिए, बहन बेटी के भाव। कहैं कबीर काम नाश का, यही सहज उपाय।।“ भावार्थ है कि दूसरी स्त्री को अपनी बहन, बेटी के भाव से देखें, जिससे परस्त्री को देखकर उठने वाली काम वासना स्वतः नष्ट हो जाती है। संत रामपाल जी परम संत तथा परमेश्वर कबीर जी के आध्यात्मिक तथा सामाजिक विचारों को जनता तक पहुँचा रहे हैं ताकि मानव जाति विकार रहित होकर परमात्मा की भक्ति करे। संत रामपाल दास जी के विचारों को सुनकर लाखों व्यक्तियों ने सब नशा त्याग दिया, सर्व बुराई त्यागकर सत्य भक्ति करते हुए निर्मल जीवन जी रहे हैं।

हम संत रामपाल जी के अनुयाई हैं, प्रत्येक गाँव में 2 से 20 परिवार आपको मिल जाऐंगे। आप उनको देखकर अंदाजा लगा सकते है कि वे अच्छे हैं या बुरे। संत रामपाल दास जी का अनुयाई बनने वाले के लिए नियम कि वह:-

शराब, माँस, तम्बाकू या अन्य नशीली वस्तुओं का सेवन नहीं करेगा।
चोरी, दुराचार, रिश्वतखोरी, ठगी नहीं करेगा,
भ्रूण हत्या मना है।
दहेज देना तथा लेना मना है।
विवाह में आडम्बर नहीं करना, नाचना-गाना मना है। आदि-आदि कुल 21 नियम हैं जिनका पालन करने वाला दीक्षा ले सकता है।
इस प्रकार संत रामपाल जी महाराज के द्वारा एक सभ्य समाज का निर्माण किया जा रहा है। धन्यवाद।।

अधिक जानकारी के लिए देखें
साधना टीवी शाम 7:30 pm 
ईश्वर टीवी रात्रि 8:30 pm

Comments

Popular posts from this blog

नशा करता है नाश

पूर्ण संत की पहचान